RBI Monetary Policy: 5 साल बाद होम लोन की EMI घटने के आसार, आरबीआई की तरफ से आज क‍िया जाएगा फैसला
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RBI Monetary Policy: 5 साल बाद होम लोन की EMI घटने के आसार, आरबीआई की तरफ से आज क‍िया जाएगा फैसला

Monetary Policy Meeting: एमपीसी की यह मीट‍िंग र‍िजर्व बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा के लिए बेहद अहम है. उन्होंने दिसंबर 2024 में अपना पद संभाला था और उनसे पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास के मुकाबले नरम रुख अपनाने की उम्‍मीद की जा रही है. 

RBI Monetary Policy: 5 साल बाद होम लोन की EMI घटने के आसार, आरबीआई की तरफ से आज क‍िया जाएगा फैसला

RBI MPC Meeting: रिजर्व बैंक ऑफ इंड‍िया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) शुक्रवार को ब्याज दर में कटौती को लेकर घोषणा कर सकती है. जानकारों की तरफ से 25 बेस‍िस प्‍वाइंट (बीपीएस) की कमी का अनुमान लगाया गया है. यह पिछले पांच साल में इस तरह की पहली कमी होगी. एमपीसी की तरफ से ब्याज दर को कम करने पर व‍िचार क‍िया जा रहा है. एमपीसी की तरफ से 5 फरवरी, 2025 को अपनी द्विमासिक समीक्षा शुरू की गई है, जो क‍ि 7 फरवरी को समाप्त होने वाली है. ऐसे में माना जा रहा है क‍ि रिजर्व बैंक ब्याज दर में थोड़ी कमी कर सकता है. इससे लोगों को लोन की ईएमआई में कमी आ सकती है.

ब्‍याज दर 25 से 50 बेसिस प्‍वाइंट कम होने की उम्‍मीद

एमपीसी की यह मीट‍िंग आरबीआई के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा के लिए बेहद अहम है. उन्होंने दिसंबर में र‍िजर्व बैंक के गवर्नर का पद संभाला था. उनसे पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास के मुकाबले नरम रुख अपनाने की संभावना जताई जा रही है. शक्तिकांत दास ने प‍िछले दो साल तक ब्याज दर में क‍िसी तरह का बदलाव नहीं किया था. ब्लूमबर्ग के एक सर्वे के अनुसार अध‍िकतर इकोनॉम‍िस्‍ट का अनुमान है क‍ि आरबीआई इस बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है, जिससे यह घटकर 6.25% पर आ जाएगा. कुछ जानकार 50 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की भी उम्‍मीद कर रहे हैं.

दो साल से रेपो रेट 6.50% के लेवल पर स्थिर
आरबीआई ने फरवरी 2023 से अपनी नीतिगत रेपो रेट को 6.50% के लेवल पर स्थिर रखा है. इससे पहले दिसंबर 2024 में द्विमासिक मौद्रिक नीति बैठक में भी छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 11वीं बार अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था. समिति के छह में से चार सदस्यों ने महंगाई दर को देखते हुए ब्याज दर को पुराने स्‍तर पर ही बनाए रखने के पक्ष में वोट क‍िया था. इससे पहले केंद्रीय बैंक ने मई, 2020 में रेपो रेट को 0.40 प्रतिशत घटाकर 4 प्रतिशत किया था. इसका मकसद यह सुन‍िश्‍च‍ित करना था कि इकोनॉमी को कोविड महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन के संकट से निपटने में मदद मिल सके.

क्‍या होता है रेपो रेट?
जिस रेट पर आरबीआई की तरफ से बैंकों को लोन द‍िया जाता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट बढ़ने का मतलब है क‍ि बैंकों को आरबीआई से महंगे रेट पर लोन मिलेगा. इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन आद‍ि की ब्‍याज दर बढ़ जाएगी, ज‍िसका आपकी ईएमआई पर सीधा असर पड़ेगा.

रेपो रेट और महंगाई का संबंध
रेपो रेट का इस्‍तेमाल आरबीआई महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भी करता है. जब इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही होती है और महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाकर खर्च को नियंत्रित करता है. इसके विपरीत, जब इकोनॉमी मंदी की ओर बढ़ रही होती है तो आरबीआई रेपो रेट कम करके खर्च और निवेश को प्रोत्साहित करता है.

होम लोन लेने वालों के लिए अहम फैसला
आरबीआई का रेपो रेट होम लोन समेत अन्‍य लोन की ब्याज दर तय करने में अहम भूमिका निभाता है. घर खरीदने का प्‍लान कर रहे लोगों को इस बैठक के फैसले का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि इससे उनके लोन पर लगने वाले ब्याज पर असर पड़ेगा. अगर आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंक अपनी लोन दरें बढ़ाते हैं, जिससे होम लोन महंगा हो जाता है. इसके उलट यद‍ि आरबीआई रेपो रेट कम करता है तो बैंक अपनी लोन दरें घटा सकते हैं, जिससे होम लोन सस्ता होगा. 

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